चमारी खुर्द छात्रावास आदिवासी बच्चों के भविष्य पर बन सकता है बड़ा खतरा

सिवनी जबलपुर दर्पण । जिले के छपारा ब्लॉक के चमारी खुर्द गांव में बन रहा आदिवासी सीनियर छात्रावास अब विवादों का केंद्र बन गया है। करीब चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस छात्रावास में भ्रष्टाचार और लापरवाही की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ठेकेदार केवल पैसे कमाने के उद्देश्य से घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि विभागीय अधिकारी मामले पर आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सीमेंट, रेत और लोहे की गुणवत्ता बेहद खराब है। भवन के कालम टेढ़े-मेढ़े खड़े हैं, दीवारों में दरारें उभर रही हैं और नींव की हालत देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह छात्रावास आदिवासी बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह छात्रावास उनके बच्चों के रहने और पढ़ाई के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण की इस हालत में उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। सबसे ज्यादा सवाल उपयंत्री खान पर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खान कभी साइट पर जाकर निरीक्षण नहीं करते और केवल ऑफिस में बैठकर कागज़ों पर रिपोर्ट पूरी कर देते हैं। उनकी इस लापरवाही का फायदा ठेकेदार उठा रहा है, जो अपनी मनमर्जी से घटिया काम कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज की गईं और मीडिया रिपोर्ट्स में भ्रष्टाचार उजागर हो चुका है, फिर भी विभागीय अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब अधिकारियों की नजर इस छात्रावास पर पड़ेगी और कब उनके लिए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सके और आदिवासी बच्चों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो यह छात्रावास बच्चों के लिए केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि संभवित जानलेवा खतरे का केंद्र बन सकता है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह सिर्फ निर्माण का मुद्दा नहीं है, बल्कि आदिवासी बच्चों के हक, उनकी सुरक्षा और उनके भविष्य का सवाल है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की त्वरित जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रावास अपने वास्तविक उद्देश्य — बच्चों के लिए सुरक्षित आवास और शिक्षा का केंद्र — को पूरा कर सके।



