श्रीमती सबिता चौधुरी के कविता-संग्रह ‘आमि साधारण घोरेर बोउ’ का भव्य लोकार्पण
प्रयागराज जबलपुर दर्पण | रविवार को बांग्ला कवयित्री श्रीमती सबिता चौधुरी के कविता-संग्रह ‘आमि साधारण घोरेर बोउ’ का लोकार्पण गरिमामय समारोह जगत तरन गोल्डन जुबिली स्कूल के रवीन्द्रालय सभागार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता, निर्देशक एवं कवि श्री तन्मय नाग ने पुस्तक का विमोचन किया।
कार्यक्रम में शहर के अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, साहित्यकार और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. हरिदत्त शर्मा, प्रो. असीम मुखर्जी, प्रो. विनय चन्द्र पाण्डेय, प्रो. काजल देव, सुरभि मित्तु सिन्हा, श्रीमती असीमा घोष (प्रधानाचार्य, जगत तारण गर्ल्स डिग्री कॉलेज), पूर्व आयुक्त श्री बादल चटर्जी, श्रीमती शर्मिला चटर्जी, सुपर्णा पांडेय सिंह तथा डॉ. रमा मॉन्ट्रोज प्रमुख रूप से सम्मिलित थे।
कविता-संग्रह की भूमिका प्रस्तुत करते हुए डॉ. मालविका पाण्डे ने बताया कि श्रीमती सबिता चौधुरी (25 दिसम्बर 1932 – 10 जून 2020) ने अपने जीवनानुभवों और स्त्री-संवेदनाओं को अत्यंत सहज भाषा में व्यक्त किया है। उनके कविता-संग्रह का शीर्षक ‘आमि साधारण घोरेर बोउ’ इस बात का द्योतक है कि वे स्वयं को समाज की पारंपरिक स्त्री भूमिका में एक साधारण गृहिणी के रूप में देखती थीं, किन्तु उनकी दृष्टि जीवन के गूढ़ और मार्मिक पक्षों तक पहुंचती थी।
उनका बचपन अविभाजित भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बीता, जहाँ उनके पिता सैन्य इंजीनियरिंग सेवा में अभियंता थे। वहीं से उनके भीतर प्रकृति और मानवीय संबंधों के प्रति गहरी संवेदना का विकास हुआ। चौदह वर्ष की आयु से उन्होंने कविताएँ लिखनी शुरू कीं। विवाह के बाद पारिवारिक उत्तरदायित्वों के साथ-साथ वे साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। उनके पति श्री सुचित चन्द्र चौधुरी, जो रेलवे इंजीनियर थे, ने उनकी साहित्यिक अभिरुचियों को सदैव प्रोत्साहित किया।
समारोह में बताया गया कि श्रीमती चौधुरी की अधिकांश कविताएँ उनके पुराने अभ्यास पुस्तिकाओं और कागज़ों में सुरक्षित थीं, जो परिवार के पुश्तैनी घर को खाली करते समय मिलीं। इन्हीं रचनाओं को उनकी बहन श्रीमती शीला ने संकलित किया तथा बांग्ला भाषा विशेषज्ञ प्रो. सुमिता चटर्जी (बी.एच.यू.) और फिल्मकार-कवि श्री तन्मय नाग के सहयोग से संपादित एवं प्रकाशित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि श्रीमती सबिता चौधुरी की कविताएँ नारी जीवन के सूक्ष्म अनुभवों और मानवीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। उनका लेखन आत्मीयता, सरलता और जीवनबोध से परिपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने कवयित्री की स्मृति को नमन करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को भारतीय बांग्ला कविता की धरोहर बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मालविका पाण्डे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती शर्मिला चटर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।



