सरकारी कर्मचारी ही फसल अवशेषों में लगा रहे आग और किसानों को बता रहे साहब गिरी

गाडरवारा जबलपुर दर्पण । कलेक्टर नरसिंहपुर के आदेश से निर्भीक शासकीय बीज निगम गाडरवारा के जिम्मेदार अधिकारी ही निगम की जमीन में लगी फसल को काट कर आग लगा रहे हैं नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिन पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का ध्यान केंद्रित नहीं हो रहा है। और किसानो के खेतों में आग लगने पर पूरी तरह साहब गिरी बता कर चालानी और वैधानिक कार्यवाही करने की धोस दिखाई जाती है।किसानों का कहना है कि प्रशासन और कृषि विभाग एक बार स्वयं एक एकड़ भूमि पर अवशेष प्रबंधन करके बताएं कि हटाने के लिए कितना खर्च आता है। मौसम की मार में वैसे ही हमारी फैसले पूरी तरह नष्ट हो रही हैं और अवशेषों के प्रबंधन पर लगने वाले खर्च का प्रबंध कहा से करें। सारे नियम और कानून अन्यदाता के लिए ही बनाए जाते हैं एक तरफ कुदरती आफत बनकर बरस रहा बे मौसम बारिश फसलों को नष्ट कर रही है वहीं दूसरी तरफ सरकार किसानों को आए दिन फांसी लगाने के लिए मजबूर कर रही है। इतना ही नहीं जब सरकारी अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं जिससे यह लगता है कि संविधान को दो भागों में बांट दिया हो एक गरीब अन्नदाता और दूसरा अमीर और रसूखदार व्यापारियों का। किसानों का गभीर आरोप हैं कि प्रशासन को उद्योगपतियों के बड़े-बड़े उद्योग, कारखाने रोड पर चल रहे वाहनों या अन्य संसाधनों से प्रदूषण नहीं दिखता है जो साल भर हो रहा है अन्नदाता के द्वारा एक दिन अपनी फसल के डंठलों (नरवाई) एवं अवशेषों में आग लगाने में ही प्रदूषण दिखता हैं।
क्या कहना है इनका :
खेत में पड़े धान के अपशिष्ट पदार्थों को जलाने की बात जब परिक्षेत्र के प्रबंधक से पत्रकारों ने जानना चाहा तो कैमरे के सामने बौखलाते हुए दोहरी बात करते दिखे 1) आग हमारे द्वारा नहीं लगाई गई है बिजली का तार गिरने से लगी है, जो पत्रकारों ने कहा कि उसे खेत में बिजली की कोई लाइन नहीं है तो प्रबंधक ने कहा कि बकरी चराने वाले लोगों के द्वारा लगाई गई है।
- कमलेश चौकसे, प्रबंधक परिक्षेत्र गाडरवारा।



