ग्राम भैंसा से खोबी तक डामर सड़क हुई बदहाल

गोटेगांव जबलपुर दर्पण । तहसील क्षेत्र के अंतर्गत प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत भेंसा गांव से खोबी गांव तक बनाई गई डामर सड़क आज पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। कभी ग्रामीणों की उम्मीदों का रास्ता रही यह सड़क अब दलदल और गड़ढों में तब्दील हो चुकी है। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, सड़क की जगह कीचड़ नजर आती है, जिसमें न सिर्फ वाहन फंसते हैं, बल्कि लोगों की दिनचर्या भी थम जाती है। भेंसा गांव के अंदर से गुजरने वाला सड़क का हिस्सा अब इतनी बुरी हालत में है कि स्थानीय को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पढ़ती है। स्कूली बच्चों को, बीमारों को,और रोज काम पर जाने वाले मजदूरों को हर दिन इस कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है दूसरी ओर दूभा झोझा गांव और राखी गांव की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। पीएम सड़क योजना के तहत बनी सड़कें यहां भी बुरी तरह टूट चुकी हैं। कहीं-कहीं डामर के चिह्न भर बचे हैं, बाकी जगह बस गढढ़े हैं जो गहरे ओर खतरनाक होने की वजह से हर दिन राहगीरों को दुर्घटना का सामना करना पड़ता है।
मरीज को हाथ ठेला या चारपाई में ले जाने मजबूर ग्रामीण
सबसे ज्यादा परेशान करने वाली स्थिति दूभा झोझा गांव की है। यहां अगर कोई बीमार हो जाए तो एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। टूटी हुई सड़क के कारण मरीजों को हाथ ठेलों या चारपाई पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। एक तरफ सरकार गांव-गांव स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की बात करती है और दूसरी तरफ जमीनी हालात उन दावों की सच्चाई उजागर कर देते हैं जरूरत है कि इन सड़कों की मरम्मत को सिर्फ एक निर्माण कार्य न समझा जाए। बल्कि इसे गांव के लोगों के जीवन और गरिमा से जोड़ा जाए।यह सिर्फ सड़क नहीं,यह बच्चों के स्कूल, महिलाओं की प्रसव यात्रा, बुजुर्गों की दवाइयों की राह और हर ग्रामीण की उम्मीद का रास्ता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो यहां जिंदगी थम सी जाती है। शासन में बैठे हुए जिम्मेदार लोगों को इस और उचित ध्यान देना चाहिए।



