सिहोरा दर्पण

हजारों सिहोरा वासी सड़क पर, आमरण सत्याग्रह से उबाल पर आंदोलन कर्ता, सिहोरा – खितौला रहा पूर्ण बंद, सभी सर्वदलीय आम नागरिकों का रहा समर्थन , बंद रहेगा जारी

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश के संसदीय क्षेत्र विधानसभा 102 सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन अब अपने सबसे निर्णायक और संवेदनशील दौर में पहुंच गया है। जहां अन्न , जल त्याग कर चुके प्रमोद साहू जी ने जल का भी त्याग करते हुए आमरण सत्याग्रह की विधिवत शुरुआत कर दी। जैसे ही वे मंच पर पहुंचे, उनके गिरते स्वास्थ्य की स्थिति को देखकर उपस्थित जनसमूह में जबरदस्त आक्रोश फैलता नजर आया । साहू जी का कमजोर शरीर, लड़खड़ाते हुए उनके कदम और चेहरे पर साफ झलकती पीड़ा ने जनता को झकझोर कर रख दिया है। साथ ही मंच के सामने मौजूद सभी लोग भावुक भी दिखे और आक्रोशित भी रहे।
उपस्थिति लोगों का कहना था कि एक शांतिपूर्ण सत्याग्रही को इस हालत तक पहुंचने देना शासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

मंगलवार को इधर, पूरे सिहोरा व खितौला में चप्पा–चप्पा बंद का नजारा देखने को मिला। हजारों की संख्या में सिहोरा वासी सड़कों पर नजर आए। बाजार बंद रहे, यातायात प्रभावित रहा और पूरा शहर सिहोरा जिला आंदोलन के समर्थन में एकजुट नजर आया।

क्या हैं मूल अधिकर की मांग – जिला लक्ष्य सिहोरा आंदोलनकारियों ने पूर्व में जारी राजपत्र और पूर्व में भाजपा नेताओं द्वारा सिहोरा को जिला बनाने को लेकर की गई घोषणाओं को दोहराते हुए सरकार से सीधा दावा किया हैं । वहीं आम जनमानस का कहना है कि जब सब कुछ दस्तावेज़ों और बयानों में दर्ज है, तो फिर फैसले में देरी क्यों?

वर्तमान सरकार को सीधी चुनौती-

आंदोलन के मंच से सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा गया कि —
“अगर जिला की घोषणा कभी हुई ही नहीं और हम सिहोरा के वासी गलत बोल रहे हैं, तो हमारे सत्याग्रह को ठुकरा दो और सिहोरा को एक ग्राम पंचायत ही बना दो।”
इस बयान ने जनता के आक्रोश को और तीखा कर दिया।

शाम को निकली विशाल वाहन रैली

शाम 4 बजे के दौरान विशाल नगर वाहन रैली
सिहोरा–खितौला क्षेत्र में विशाल वाहन रैली निकाली गई। इस दौरान युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। रैली के दौरान हर तरफ ‘सिहोरा जिला बनाओ’ के नारे गूंजते रहे।

व्यापारियों का निर्णायक ऐलान

व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट कहा कि सिहोरा जिला बनने तक बंद जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह अब आर्थिक नुकसान का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और सम्मान का भी सवाल है।

आज सिहोरा की सड़कों से सरकार तक एक ही संदेश गया है—
अब आंदोलन रुकेगा नहीं।
यह लड़ाई अब मांग की नहीं, अधिकार और आत्मसम्मान की लड़ाई बन चुकी है।

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