सिहोरा दर्पण

सिहोरा में जनाक्रोश चरम पर, खितौला–सिहोरा दूसरे दिन भी पूरी तरह बंद

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर संभाग के मुख्यालय सिहोरा को जिला बनाए जाने की लगातार मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। दूसरे एवं तीसरे दिन भी खितौला–सिहोरा पूरी तरह बंद रहा। बाजार, प्रतिष्ठान, यातायात सब बंद रहे।
वहीं सड़क पर उतरे आक्रोशित नागरिकों ने टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया और शासन–प्रशासन का पुतला भी फूंका, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

धरना स्थल पर जैसे ही आमरण सत्याग्रह कर रहे प्रमोद साहू मंच पर पहुंचे, वहां मौजूद हजारों नागरिक भावुक हो उठे। मंच से उन्होंने दो टूक शब्दों में संकल्प दोहराया कि

“यह अन्न–जल त्याग आमरण सत्याग्रह मेरी आखिरी सांस तक जारी रहेगा। सिहोरा जिला बनकर रहेगा।”उनका यह ऐलान सुनते ही भीड़ में गुस्सा और जोश दोनों और उफान पर आ गए।

परिषद भी सड़क पर, विभिन्न पार्षद ने इस्तीफे की दी चेतावनी-आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब भाजपा के एक पार्षद बेबी विनय पाल और कांग्रेस के पार्षद राजेश चौबे और अरशद खान के साथ सभी 6 पार्षदों ने सिहोरा जिला के समर्थन में इस्तीफा देने तक की सार्वजनिक घोषणा कर दी।

भव्य रैली, लेकिन सरकार मौन-दोपहर तीन बजे जोरदार रैली सिहोरा खितौला के मुख्य मार्गो से निकाली गई। “सिहोरा जिला बनाओ”, “अब और इंतजार नहीं” जैसे नारों से पूरा नगर गूंजता रहा।
क्यों बना रही वर्तमान सरकार दूरी – इतने बड़े एवं संघर्ष के बावजूद भी सरकार की ओर से अब तक न कोई आश्वासन, न कोई संकेत सामने आया है। इसी कारण आंदोलनकारियों में रोष और अधिक बढ़ रहा है।

तीन जन करेंगे आत्मदाह – उत्तेजित और आक्रोशित सिहोरा वासियों में तीन लोगो ने आत्मदाह की घोषणा कर दी। आने वाले दिनों में सिहोरा निवासी जाकिर खान द्वारा 12 दिसंबर को,पल्लू महाराज द्वारा 16 दिसंबर को और वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार तिवारी द्वारा एक जनवरी को आत्मदाह करने की घोषणा की है।

आंदोलन और उग्र होने के संकेत

प्रशासनिक चुप्पी और सरकार की उदासीनता के चलते यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। जनभावना साफ है —
अब सिहोरा जिला बनना सिर्फ मांग नहीं, जनआंदोलन का संकल्प बन चुका है।

देर शाम बिगड़ी तबियत, अस्पताल में स्थानीय जन एवं प्रशासन की मौजूदगी – अनशन और अन्न जल त्याग कर चुके प्रमोद साहू जी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शासकीय अस्पताल सिहोरा लाया गया जहां जबलपुर से आई डॉक्टर की टीम और कलेक्टर की प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें जबलपुर ले जाने का वक्तव्य जारी किया गया।
सिहोरा वासी भारी संख्या में अस्पताल के प्रांगण के बाहर इकट्ठे हुए और जैसे ही पता लगा कि प्रमोद साहू जी को जबलपुर ले जाने प्रशासन पूर्ण तैयार हैं । अस्पताल कैम्पस में ही जोरदार नारेबाजी के साथ एंबुलेंस को अलग कराया। सिहोरा वासी और आंदोलनकारी उन्हें जबलपुर ले जाने का विरोध कर रहे हैं वहीं प्रशासन उन्हें जबलपुर ले जाने के लिए तैयार था। लेकिन स्थिति अनियंत्रित जैसी बन चुकी है मजबूर होकर देर रात्रि जिला प्रशासन ने फॉर्म में साइन करा कर वापिस लौट गए।
फिलहाल अभी ब्लड, ईसीजी, बीपी एवं उनका ऑक्सीजन लेबल की जांच पड़ताल देर रात्रि तक जारी रहा।

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