देखरेख की कमी व बढ़ते मावन संसाधन से विलुप्त की ओर कुएं

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों एवं महानगर से लेकर तहसील और ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी के चलते पानी पानी के लिए कोहराम मचा हुआ हैं। जहां नदी तालाब सूख गए हैं और हैडपम्प हवा दे रहे हैं। इसका मतलब मानव जीवन पर घोर संकट पैदा कर सकता हैं। आज के वर्तमान समय एवं मानव सुविधाओं के बढ़ते संसाधनों ने प्रकृति एवं पुरानी धरोहर की नष्ट करती चली जा रहीं हैं। एवं ओर वनों की अंधाधुंध कटाई तो दूसरी ओर जल संरक्षण जैसे कुआं, तालाब, बावली, पोखर, इनकी घटती संख्याओं से वातावरण अधिक गर्म होता चला जा रहा हैं। जिससे मानव जीवन को खतरा तो हैं ही वहीं जीव, जंतु, पशु पक्षियों को एक एक बूंद पानी के लिऐ इधर उधर भटकना पड़ रहा हैं।
हमारे मीडिया प्रतिनिधि ने जब जिले से लेकर तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण से जुड़े हुए प्राचीन तालाब, कुआं, बावलियों जैसी नदियों के रखरखाव के बारे में बारीकी से खोजबीन कर उनके हालातों पर गौर किया तो मानो शरीर के रोंगटे खड़े हो गए।
इतनी गम्भीर और आश्चर्य बातें सामने दिखाई दी कि राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही एवं इनकी अनदेखी के चलते पुरानी धरोहरें विलुप्तप्राय की कगार पर दिखाई दे रहीं हैं।
शासन प्रशासन की जिम्मेदारी – इन प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा एवं सुविधाओं के लिए आई राशि का प्रयोग कहा हुआ। 20 वर्षों से नहीं हुई इनकी देखरेख व सफाई व्यवस्था। सुरक्षा की दृष्टी से तहसीली व ग्रामीणों क्षेत्रों में जाली लगाने और बारिश के पहले इनकी साफ सफ़ाई कराने की जिम्मेदारी। बढ़ते जल स्तर की कमी को लेकर बोरिंगों में रोक लगाना चाहिए। पर सभी जिम्मेदार एक दूसरे पर लगाते लापरवाही का अधिकार।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं की विचित्र हालत – ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं की हालत बदतर हो चुकी है, वे अब सिर्फ विलुप्त होने की कगार पर हैं। हैंडपंप और सबमर्सिबल के बढ़ते इस्तेमाल से पुराने कुएं गंदगी, कूड़े-कचरे का अड्डा बन गए हैं । जहां जल संरक्षण के ये पारंपरिक स्रोत उपेक्षित हैं। कई जगहों पर पानी के लिए अभी भी लोग रातभर कुएं के पास लाइन लगाने को मजबूर हैं।
वर्तमान स्थिति के मुख्य बिंदु अस्तित्व का संकट: गांव-गांव में हैंडपंप लगने से कुओं की देखभाल बंद हो गई है, जिससे वे मिट्टी से भर रहे हैं।
प्रदूषण: खुले कुएं गंदे पानी और कचरे के कारण पीने योग्य नहीं रह गए हैं। जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।
जल स्तर में गिरावट: भूजल स्तर नीचे जाने के कारण बहुत से कुएं गर्मी के दिनों में पूरी तरह सूख जाते हैं।
जल संकट: मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ ग्रामीण इलाकों में, हैंडपंपों के जवाब देने के बाद भी, गंदे कुओं का पानी उपयोग करने को लोग मजबूर हैं।
अतिक्रमण: पुरानी धरोहर होने के बावजूद कई कुओं पर अवैध कब्ज़े की कोशिश और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि अभी भी भूजल स्तर गिरने के बाद भी, कुछ ग्रामीण समुदायों को अब कुओं के महत्व का अहसास हो रहा है और वे इन्हें फिर से पुनर्जीवित करना चाहते हैं।
प्रदेश राज्य सरकार जल्द ही इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए। इनको पुनः जीवन दान देकर जल संरक्षण में भागीदार के साथ अन्य सभी को प्रेरणा के साथ आदेश जारी कर इनकी सुरक्षा, साफ सफ़ाई और इनका निर्माण कराए।
समय रहते समय के साथ।



