आत्मा के आलोक में भीतरी शत्रुओं का नाश ही विजयादशमी का उद्देश्य

नवरात्रि की सहज ध्यान द्वारा की गई उपासना देती है विनम्रता
इंदौर। आत्मा के प्रकाश में भीतरी नकारात्मकता क़ा नाश करना ह़ी वास्तव में विजयादशमी मनाना है।
सहज योग प्रतिष्ठान पुणे द्वारा दिनांक 17 से 25 अक्टूबर तक मनाए जा रहे नवरात्रि महोत्सव के विषय में बताते हुए पुणे प्रतिष्ठान एवं नई दिल्ली सहज योग ट्रस्ट से जुड़े हुए इंदौर के समन्वयक श्री सुरेंद्र भिड़े जी ने बताया कि पिछले 9 दिनों से लगातार की जा रही ऑनलाइन उपासना एवं ध्यान प्रक्रिया का विश्व के लगभग 90 देश के साधकों ने लाभ उठाया है अत्यंत आनंद एवं उल्लास की प्रतिक्रियाओं के साथ समस्त विश्व को एक मंच पर देखना वर्तमान की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
अंतरराष्ट्रीय सहज योग संस्था की फाउंडर श्री माताजी निर्मला देवी जीने अपने अनुकरणीय प्रवचनो में विविध ऊर्जा केंद्रों में शक्ति की स्थापना का सहज तरीका व्यक्त किया है ध्यान पद्धति में,जिसका अनुकरण किया जाता है
नवरात्रि की सहज ध्यान द्वारा की गई उपासना सहजयोगी को विनम्र बनाती है क्योंकि यह प्रकृति के नियम का पालन करती है।प्रकृति में फलित वृक्षों की सबसे बड़ी बात है धरती माता की ओर झुकना, नम्र होना, जो झुकते हैं उन्हें अच्छे और परिपक्व फल के रूप में स्वीकार किया जाता है , परिपक्व फल अपने वजन से विनम्रता दिखाता है। वह गुरु तत्त्व है – भार। तो विराटांगना शक्ति से, हमें फल तक परिपक्वता की शक्ति मिलती है और फिर हम गुरु सिद्धांत से धन्य हो जाते हैं।तब अपनी प्रकाशित आत्मा के आलोक मे हम भीतरी बुराइयो को नष्ट कर पाते हैं।यही विजय का उत्सव है।
उल्लेखनीय है कि सहज योग अंतर्राष्ट्रीय संस्था भारतीय अध्यात्म की विश्व में बड़ी प्रचारक बन गई है क्योंकि सहज योग भारतीय अध्यात्म की नीव को गहरा कर रहा है वह भी निशुल्क। इसके लिए वेब स्थली www.sahajayoga.org.in पर विजिट किया जा सकता है एवं टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 पर संपर्क किया जा सकता है।



