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यह कैसी जांचः पंद्रह आरोपी और सिर्फ एक पर एक्शन


राजनैतिक दखलंदाजी के कारण सुखियों में टीआरएस
रीवा दर्पण। विंध्य प्रदेश के जिस टीआरएस कॉलेज की अहमियत राष्ट्रीय स्तर पर जगजाहिर है। ऐसे कालेज को लेकर जबरिया की राजनैतिक दखलंदाजी ने टीआरएस कालेज को विंध्य की सियासत का केंद्र बना दिया है। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने हाल ही में आर्थिक अनियमितता जैसे संवेदनशील मामले को लेकर निलंबन आदेश जारी किया है। 14.09 करोड़ रुपए के भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच को स्पेशल कमेटी ने अंजाम दिया है। स्पेशल जांच कमेटी ने शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय को लेकर जो जांच प्रतिवेदन शासन स्तर पर सौंपा है, उसमें कुल 15 आरोपियों का नाम उजागर किया गया है। राजनैतिक विकास पुरुष के भारी प्रभाव में आकर प्रशासनिक अधिकारियों को कुछ ऐसे काम भी करने पड़ जाते हैं जिसके लिए उनका जमीर गंवारा नहीं करता। टीआरएस कालेज को विंध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने राजनैतिक दखलंदाजी का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। प्रशासनिक व्यवस्था की देखरेख में कराई गई स्पेशल जांच रिपोर्ट के सनसनीखेज प्रतिवेदन में तीन कर्मचारियों सहित कुल पंद्रह आरोपियों के नाम शामिल होने के बावजूद हायर एजुकेशन स्तर से केवल एक पर निलंबन की कार्रवाई किया जाना, समझ से परे है। सूत्रों ने बताया कि विकास पुरुष के राजनैतिक पावर के कारण ही टीआरएस कालेज विंध्य की सियासत का केंद्र बन गया है। राजनैतिक गलियारों से मिल रही सूचना आथिर्क अनियमितता के सनसनीखेज मामले में शामिल दूसरे आरोपियों पर भी कार्रवाई का शिकंजा कसता जा रहा है। हालांकि टीआरएस कालेज के अन्य आरोपी कहे जाने वाले प्राधयको की हालत सबसे ज्यादा खराब चल रही है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 में आर्थिक अनियमितता के मामले में शामिल अन्य आरोपी प्राध्यापक कार्रवाई से बचने के लिए नेताओं की चरण वंदना करने में ज्यादा समय दे रहे हैं। लपेटे में आने वाले प्रोफेसरों की मौजूदगी इस समय मध्य प्रदेश के उपचुनाव वाली अनुपपुर सीट के लिए होने वाले चुनाव प्रचार में देखने को मिल रही है। जिस दिन टीआरएस कालेज के मामले में एकपक्षीय कार्रवाई का आदेश जारी हुआ था, उसी दिन अनुपपुर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चुनावी सभा चल रही थी। यहां पर प्रायोजित विकास पुरुष और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल के साथ साथ टीआरएस कालेज के अन्य आरोपियों में शामिल बहुत से अधिकारियों को देखा गया है। सभी शासन की कार्यवाही से बचने के लिए विकास पुरुष की परिक्रमा करने में लगे हुए हैं। अनुपपुर में चरण वंदना करके वापस लौटने वाले आरोपी प्राध्यापकों के बीच विकास पुरुष को लेकर खिज बराबर दिखाई दे रही है। उधर टीआरएस कालेज में हुए आर्थिक घोटाले में शामिल सभी आरोपियों पर कार्रवाई के लिए परस्पर सरकारी मशीनरी के ऊपर दबाव बनाया जा रहा है। छटपटा रहे आरोपी प्राध्यापकों का समूह केवल यही प्रार्थना परमेश्वर से कर रहा है कि किसी तरह विकास पुरुष हम लोगों को इस बार बचा लें तो आगामी विधानसभा चुनाव में बखूबी सबक सिखाएंगे।

दो पूर्व प्राचार्य सहित पंद्रह आरोपियों के नाम शामिल
शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय से संबंधित आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामले में जांच कमेटी ने टीआरएस कालेज के दो पूर्व प्राचार्य डॉ सत्येन्द्र शर्मा और डॉ एसयू खान को भी आरोपी माना है। 14.09 करोड़ रुपए के आर्थिक अनियमितता के मामले में डा अजय शंकर पाण्डेय, डॉ बीपी सिंह, डॉ संजय शंकर मिश्रा, डॉ आरपी चतुर्वेदी, डॉ अवध शुक्ला, डॉ संजय सिंह, डॉ श्रीनाथ पाण्डेय, डॉ कल्पना अग्रवाल सहित अन्य का नाम शामिल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब स्पेशल जांच कमेटी ने अपने जांच प्रतिवेदन में आर्थिक अनियमितता के लिए 15 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। जब आरोपियों की संख्या पंद्रह है तो केवल एक पर शासन स्तर से कार्रवाई क्यों हुई? जब सभी आरोपियों पर एक ही तरह का आरोप है तो एक पक्षीय आदेश निकलने के बाद मामला कैसे शांत हो गया? जिस जांच प्रतिवेदन पर एक पक्षीय कार्रवाई की गई है, वह भी सरासर गुमराह करने वाला नजर आता है। सूत्रों ने बताया कि विंध्य प्रदेश के विकास पुरुष की निगाहों में कांटे की तरह चुभने वाले टीआरएस कॉलेज को विंध्य की सियासत का केंद्र बना दिया है। पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल की विशेष दिलचस्पी टीआरएस कॉलेज को लेकर बराबर बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच प्रतिवेदन में शामिल चौदह अन्य आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

आरटीआई कानून बना रोजी रोटी का बड़ा सहारा
केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने साल 2009 के दौरान आम जनता को ताकतवर बनाने के लिए आरटीआई जैसा मजबूत कानून दिया है। सूचना के अधिकार के तहत सरकारी विभागों में हर दिन सैकड़ों आवेदन लगाए जाते हैं। देश के इसी अति महत्वपूर्ण कानून को लोगों ने अपनी रोजी-रोटी का बड़ा सहारा बना लिया है। एक ऐसे ही महानुभाव तथाकथित समाज सुधारक संभागीय मुख्यालय रीवा में विशेष ख्याति अर्जित कर चुके हैं। आरटीआई 2009 के सहारे धनवान लोगों पर गहरा दबाव बनाने में कामयाब होने वाले तथाकथित समाजसेवी अपनी सुझबुझ से समाज में सम्मान हासिल कर रहे है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के साथ साथ शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय जैसी संस्थाएं ब्लैक मेलर आरटीआई कार्यकर्ता के लिए कमाई का सबसे बड़ा जरिया बनी रहती हैं। संभागीय मुख्यालय रीवा में सोशल मीडिया की पत्रकारिता करने वाले ना समझ पत्रकारों की जमात में वाट्स अप मीडिया मंच सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। रियासत जैसे अति महत्वपूर्ण शब्द की मर्यादा से खिलवाड़ करते हुए रोजी रोटी का मकसद पूरा किया जाता है। मास्टरमाइंड आरटीआई कार्यकर्ता ने रीवा जिला सहित विंध्य प्रदेश के बहुत से अधिकारियों को अपना सेफ निशाना बना लिया है। आरटीआई कानून के सहारे हजारों की कमाई करने वाले तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ता का धंधा हर मौसम में जोरों पर चलता है। समाज में प्रभावी मान सम्मान रखने वाले लोगों को विशेष रूप से आरटीआई कार्यकर्ता निशाना बनाता है। तथाकथित समाजसेवी वाट्स अप मीडिया मंडी के सहारे टीआरएस कॉलेज जैसे नामचीन शैक्षणिक संस्थानों को बदनाम करने का सामाजिक काम करने में लगे हुए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के लिए भी वसूलीबाज आरटीआई एक्सपर्ट बड़ी आफत से कम नहीं है। निस्संदेह ऐसे तथाकथित समाज सुधारकों पर प्रशासन को विशेष नजर रखनी चाहिए।

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