डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

वर्षों की कड़ी मेहनत से पत्थरों को तराशकर प्रेमा दास ने बनाई दर्जनों कलाकृति

आने वाले समय में पर्यटन के रूप में पहचान दिलवाना चाहते हैं प्रेमा दास।

हथोड़ा व छैनी की मदद से बनाई गई है पत्थरों की मूर्तियां

नंदकिशोर ठाकुर डिंडोरी ब्यूरो। जिला मुख्यालय डिंडोरी से लगभग 18 किलोमीटर दूर डिंडोरी अमरकंटक मार्ग पर बजाग जनपद मुख्यालय अंतर्गत ग्राम पंचायत गीधा से लगभग तीन किलोमीटर दूर नर्मदा धाम अकला घाट पर कड़ी मेहनत व परिश्रम से नर्मदा किनारे पहाड़ी क्षेत्र में पत्थरों को तराशकर दर्जनों कलाकृति बनाई गई है।कलाकृति निर्माण कार्य के दौरान जहां छैनी, हथौड़ा की मदद से हिंदू देवी, देवताओं के दर्जनों कलाकृति कड़ी मेहनत व श्रम से तैयार की गई है, जिसे देखने आसपास गांव के स्थानीय ग्रामीण भी पहुंच रहे हैं। बताया गया कि समनापुर जनपद के कुकर्रामठ गांव में स्थित ऐतिहासिक ऋणमुक्तेश्वर शिव मंदिर व खाम्हा गांव के जंगल में स्थित नर्मदा कुंड अमलेऋवर धाम बिहर ओर बजाग जनपद मुख्यालय अंतर्गत गीधा गांव के पास नर्मदा नदी किनारे अकला घाट प्रसिद्ध है, जिसे स्थानीय लोग शिव क्षेत्र के नाम से जानते हैं। स्थानीय लोगों में आस्था है कि इस तीन कोशीय अकला घाट,अमलेऋवर धाम नर्मदा कुंड बिहर व ऐतिहासिक ऋणमुक्तेश्वर शिव मंदिर क्षेत्र धार्मिक स्थलों के रूप में प्रसिद्ध है,मान्यता है कि इन धामों की परिक्रमा करने से लोगों की मनोकामना पूरी होती है।

  • पर्यटन के रूप में विकसित करवाना चाहते हैं प्रेमा दास।

बजाग जनपद के गीधा गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर नर्मदा किनारे अकला घाट पर गीधा गांव के प्रेमदास राठौर द्वारा हथौड़ा व छैनी की मदद से पत्थरों पर अद्भुत दर्जनों कलाकृति बनाई गई है, जिसे देखने आसपास गांवों के सैलानी अकला घाट पहुंच रहे हैं। जानकारी में प्रेमदास द्वारा बताया गया कि वह पिछले कई वर्षों से नर्मदा किनारे पत्थरों को तराशकर मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं, बिना किसी सहायता से स्वयं मेहनत कर अद्भुत कलाकृति का निर्माण किया गया है, प्रेमादास चाहते हैं कि आने वाले समय में यहां सैलानी पहुंचें और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए। स्थानीय लोगों में आस्था है कि इन तीन कोशीय यात्रा से नर्मदा परिक्रमा करने के बराबर पुन्य, फल प्राप्त होते है।

  • नर्मदा पुराण में मिलता है उल्लेख।

नर्मदा पुराणों के स्थानीय जानकार बताते हैं कि इन तीन कोशीय यात्रा का उल्लेख नर्मदा पुराणों में भी मिलता है, लेकिन पूरी जानकारी व सुगमता पूर्वक रास्ता न होने के कारण नर्मदा परिक्रमा करने वाले अधिकतर नर्मदा भक्त कुकर्रामठ गांव में स्थित ऐतिहासिक ऋणमुक्तेश्वर मंदिर तक ही पहुंच पाते हैं, अन्य दो स्थानों पर सुगमता पूर्वक रास्ता न होने कारण नर्मदा परिक्रमा करने वाले अधिकतर नर्मदा भक्त गीधा गांव के अकला घाट व खाम्हा गांव के जंगल में स्थित अमलेश्वर धाम नर्मदा कुंड बिहर तक नहीं पहुंच पाते, कारण की सुगम रास्ते नहीं है। स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द बिहर धाम व अकला घाट तक दोनों धार्मिक स्थलों पर सुगमता पूर्वक रास्ता बनवाए जाने की मांग की जा रही है एवं शासन प्रशासन से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है।

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