नरसिंहपुर दर्पणमध्य प्रदेश

अब प्रतीक्षा नही प्रतिज्ञा करेंः समर्थ सद्गुरु

नरसिंहपुर। मां नर्मदा को मध्यप्रदेश व गुजरात की जीवन रेखा के रूप में सभी जानते हैं , और उसे मानते भी है पर माँ की वास्तविक स्थिति को समाज नही देख पा रहा है। सर्वोच से समाज के आखिरी छोर तक यह बात समझने का अब समय आ गया है माँ की ओर देखने का, माँ की सच्ची सेवा का। माँ के संरक्षण संवर्धन की अलख जन जन तक जगाने पिछले 377 दिनों से माँ के जल को अपना जीवन आधार बना, संपूर्ण आहारों का त्याग कर सत्याग्रह कर रहे हैं समर्थ सद्गुरु भैया जी सरकार ने उक्ताशय के उदगार अल्प प्रवास पर करेली पहुंचने पर व्यक्त किये। उन्होंने शनिवार शाम करेली में समाजसेवी दिनेश यादव के निवास पत्रकारवार्ता को सम्बोधित किया।
दुनिया की सबसे बड़ी हंगर स्ट्राइक कर रहे समर्थ सदगुरु-विदित हो कि 377 दिनों से सदगुरुदेव अन्न आहार का त्याग कर मां नर्मदा के संरक्षण की मुहिम को जन जन तक पहुचाने सत्याग्रह कर रहे हैं। यहां उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि गुप्त हो रही मां नर्मदा, विलुप्त हो रहे जीवन क्षेत्र को बचाएं अब प्रतीक्षा नही प्रतिज्ञा करें अब बिना देर किए हमे प्रकृति को केंद्र में रख विकास व्यवस्था की अवधारणा को साकार करना होगा। मां नर्मदा संरक्षण के लिए आम जन को आगे आना होगा । तत्काल सबको मिलकर माँ नर्मदा के संरक्षण संवर्धन के लिए कदम उठाने होंगे। माँ नर्मदा के जीवन को बचाने के लिए पिछले 377 दिनों से प्रकृति उपासक समर्थ सद्गुरु श्री भैयाजी सरकार निराहार रहकर सिर्फ नर्मदाजल पीकर अनशन रत हैं। इस अनशन का प्रमुख कारण जबाबदारों और जम्मेदारों कि नजरअंदाजी और गैर जिम्मेदारी है।
ज्ञातव्य है कि माँ नर्मदा व अन्य पवित्र नदियों ,गौवंश एवम प्रकृति के संरक्षण सम्वर्धन के लिए भारत में 2010 से जो सर्वोच्च व सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया जा रहा है वह कर रहे हैं। समर्थ सदगुरु श्री भैयाजी सरकार जिनका समूचा व्यक्तित्व ही प्रकृतिमय है जिनके चिंतन, मनन,आचार, विचार, व्यवहार, में सिर्फ और सिर्फ प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन ही है।उनका न कोई मठ है न आश्रम और न ही कोई संचय ।उन्होंने कर्म के माध्यम से प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन और कर्तव्य को मिश्रित कर आध्यात्म का सुंदर मार्ग प्रशस्त किया है। उनकी अविराम प्रकृतिसाधना ने समाज में प्रकृति संरक्षण का अकल्पनीय जनजागरण किया है।
समाज के उत्थान औऱ सृष्टि के सम्वर्धन संरक्षण के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्होंने जबलपुर मध्यप्रदेश में 12 जनवरी 2010 को नर्मदा मिशन की स्थापना की जिसका उद्देश्य मानव को मानव से तथा मानव को प्रकृति से जोड़ना है। स्थापना के बाद से ही नर्मदा मिशन भैयाजी सरकार के मार्गदर्शन व सानिध्य में पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ पूरे प्रदेश में मानव सेवा, गौसेवा, नर्मदाजल शुद्धिकरण ,प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन का कार्य करते हुए सफलता के उच्चतम आयाम पर है।तथा अनेकों अभूतपूर्व अभिनव प्रयोगों द्वारा प्रकृति संरक्षण करने के लिए सम्पूर्ण समाज में जनजागरण करने वाला नर्मदा मिशन पहला समूह बन गया है। नर्मदा मिशन ने समूचे समाज को प्रकृति से जोड़ने के साथ ही उच्चतम शिखर पर अपने सफलता के ध्वज भी लहराए हैं जिसमें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड जैसे अवार्ड भी शामिल हैं। जिसका पूरा श्रेय समर्थ सद्गुरु भैयाजी सरकार के विचारों और अभिनव प्रयोगों को जाता है।
नर्मदा मिशन की याचिका पर कार्यवाही करते हुए हाईकोर्ट ने हाई फ्लड लेवल से 300 मीटर तक की प्रॉपर्टी को माँ नर्मदा की प्रापर्टी घोषित किया है इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण संग्रहण व निर्माण कार्य अवैध है। बावजूद इसके न्यायालय की अवमानना करते हुए निरंतर अतिक्रमण व निर्माण कार्य चल रहा है वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जिससे नर्मदा का जीवन खतरे में पड़ चुका है । भैयाजी सरकार द्वारा बार बार प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो नर्मदा के अस्तित्व को एवं आने वाली पीढ़ी के जीवन को बचाने के लिए समर्थ सदगुरु भैया जी सरकार ने 17 अक्टूबर 2020 निराहार महाव्रत आरम्भ कर दिया जिसे उन्होंने “सत्याग्रह “नाम दिया है। वे केवल नर्मदाजल पीकर नर्मदा के तटीय क्षेत्रों व वनों में रहकर उपवास कर रहें हैं। यह वर्तमान इतिहास में जल और प्रकृति की रक्षा के लिये किसी के द्वारा निस्वार्थ की गई सबसे लंबी और बड़ी भूख हड़ताल है। यह समर्थ सद्गुरु भैयाजी सरकार का दूसरा सत्याग्रह है पहला सत्याग्रह भी उन्होंने मां नर्मदा के जीवन को बचाने के लिए अपनी तीन मांगों के साथ 18 माह तक निराहार रहकर किया था। किंतु बेहद अफसोस की बात है कि सत्ता और प्रशासन की आंखें मुंदी हुई हैं ना ही उन्हें एक संत की करुण पुकार सुनाई दे रही है और ना ही आने वाले समय की भयावहता दिखाई दे रही है जिसमें मध्यप्रदेश, गुजरात,महाराष्ट्र और राजिस्थान का जनजीवन घोर संकट में आ जायेगा चूंकि नर्मदा ही इनका जीवन है। इन जबाबदारों के अपने किसी लोभ के कारण किये जा रहे सुस्त रवैये से एक संत के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है।

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