छतरपुर दर्पण

तहसील जतारा में कामकाज की रफ्तार धीमी,भ्रष्टाचार की बू से उठे सवाल

टीकमगढ़ जबलपुर दर्पण । तहसील जतारा में शासकीय कामों को लेकर लगातार हो रही देरी अब आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गई है। दस्तावेज़ सत्यापन, नामांतरण,नक़्शा पासिंग, जाति और आय प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सेवाओं में महीनों की देरी आम बात हो गई है। जनता का आरोप है कि बिना रिश्वत दिए यहां कोई काम समय पर नहीं होता।ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले कई आवेदकों का कहना है कि बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद उनका काम नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में कर्मचारियों द्वारा फ़ाइलें “लापता” बताई जाती हैं, तो कहीं “सिस्टम डाउन” का बहाना बना दिया जाता है।

रिश्वत के बिना नहीं होता काम -एक स्थानीय किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नामांतरण की फ़ाइल तीन महीने से लंबित पड़ी है। जब उन्होंने कारण पूछा तो क्लर्क ने इशारों-इशारों में ‘खर्चा पानी’ की मांग कर दी। जब यह नहीं दिया गया, तो फ़ाइल आगे बढ़ी ही नहीं।

ऑनलाइन सिस्टम भी बना भ्रष्टाचार का खास औजार-सरकार भले ही ऑनलाइन सिस्टम को पारदर्शिता का जरिया बता रही हो, लेकिन यहां तो ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी आवेदकों को तहसील आकर कर्मचारियों की खुशामद करनी पड़ती है। कुछ मामलों में ऑनलाइन आवेदन स्वीकृत होने के बाद भी “ऑफलाइन फाइल” की मांग की जाती है – जो भ्रष्टाचार की एक नई चाल बन गई है।

अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में-अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार से जब इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने “जांच कराने” की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुछ कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे उनके ऊपर ‘स्थानीय सेटिंग’ और ‘सांठगांठ’ के आरोप लगते रहे हैं। अनुविभागीय अधिकारी की डिजीटल साइन पैनड्राइव चलाने वाले कर्मचारी द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण है।एक अगस्त को जाति प्रमाण पत्र के प्रकरण डिस्पोजल होने थे। किन्तु आज दिनांक तक पेन्डिंग दिखाई दे रहे हैं। इनके आवेदन क्रमांक सुरक्षित हैं। जिन्हें समाचार पत्र में प्रकाशित नहीं कर रहा हूं। क्योंकि इन्हें सुधारने का मौका मिल जाएगा।

जनता की मांग:- उच्चस्तरीय हो जांच-स्थानीय संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने तहसील के कामों में हो रही देरी और भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आम जनता को न्याय नहीं मिल पाएगा।

इनका कहना है-
मुझे आपके द्वारा जानकारी मिली है मैं तुरंत कर्मचारियों को निर्देशित करता हूं और कोशिश करूंगा की प्रकरणों में जल्द सुनवाई हो और निराकरण किया जा सके।
संजय दुबे
अनुविभागीय अधिकारी जतारा।

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