कटनी दर्पण

शेषनाग धाम कुंआ वर्ष से चली आ रहीं प्राचीन प्रथा

मनीष श्रीवास कटनी। मध्यप्रदेश की कटनी जिले अंतर्गत बहोरीबंद क्षेत्र के शेषनाग मंदिर कुंआ धाम में हर ऋषि पंचमी को नागों के नाग देवा तक्षक शेषनाग की पूजा एवं उनकी आपार शक्ति से लाखों लोगों को पुनः जीवन दान मिला हैं। यहां की परंपरागत विगत 113 वर्षों से नियंत्रर ऋषि पंचमी को साल की सबसे बड़ी पूजा श्रद्धाभाव के साथ दोपहर 12 बजे के दौरान की जाती हैं। आप सभी को बता दे कि इस स्थान का महत्त्व जब लोगों को पता लगता है जब कोई भी व्यक्ति सर्प के काटने ( डसने) से वह यहां के मंत्रों के शक्ति उच्चार से ही सर्प का प्रकोप कम होते होते वह पूर्ण स्वास्थ्य हो जाता हैं। उसके बदले में साल की सबसे बड़ी पूजा में वह पीड़ित स्थान पहुंच कर आशीर्वाद लेने जरूर आता हैं। और अपनी स्वेच्छा अनुसार एक श्रीफल अन्य सामग्री यहां चढ़ा जाता हैं। वहीं प्राचीन प्रथा आज भी लगातार जारी हैं। पूजन, हवन के बाद जिन भी व्यक्ति को सर्प दंश से पीड़ित रहते हैं वह यहां आते ही उनके शरीर में सर्प की लहर जरूर दिखाई देती हैं और कुछ देर के लिए सभी चीखने, फ़ुसकारने लगते हैं। जिसे जल छिड़काव के बाद सभी दर्शन करने पर शांत और सुरक्षित रहते हैं।
मंदिर प्रांगण के मुख्य कार्यकर्ता – राम मिलन नायक (फ़णीश भाई) , पन्नालाल नायक, अशोक नायक, दीनदयाल नायक, रबी नायक, रोहणी सेन, लल्लू नामदेव, लाल जी सेन द्वारा मंत्रों उच्चारण के माध्यम से पीड़ित व्यक्तियों का कवच बंधन करते हैं। आज के वर्तमान दौर में यहां प्रशासन को भी मानना पड़ा कि शेषनाग धाम में शक्ति तो हैं इस लिए हजारों की संख्या में लोग यहां दर्शन करने जरूर आते जाते हैं।
राम मिलन नायक फ़नीश भाई – मीडिया को जानकारी में बताया कि ऋषि पंचमी को हम सभी 113 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं और सफलता के साथ शेषनाग महाराज के आशीवार्द से आने जाने वाले सभी भक्तों को पूर्ण लाभ मिलता है।
वहीं यहां एक किलो मीटर तक मेला के साथ साथ कुश्ती दंगल का प्रति वर्ष आयोजन चलता आ रहा हैं। पहलवान अपने दांवपेंच कर ईनाम, शील्ड जीत कर यहां दूर दूर के लोग जरूर आते हैं।
बहोरीबंद एसडीएम राकेश कुमार चौरसिया, तहसीलदार,थाना प्रभारी, पुलिस स्टॉप की उपस्थित में विशाल दंगल मेले का आयोजन देर शाम तक चलता रहा।
कुश्ती दंगल में जीतने वाले सदस्यों को ग्राम सरपंच कुआं की ओर एक शील्ड एवं नगद राशि प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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