राजनीतिक दलों के लोगों को बीएलओ सहायक न बनाया जाए

सीधी जबलपुर दर्पण । पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि प्रदेश में चल रही एसआईआर की संवेदनशील प्रक्रिया संदेह में घिर गई है, इसमें जन अभियान परिषद और बाहरी संगठनों के लोगों की नियुक्तियां बीएलओ सहायक के रूप में की जा रही है इससे सम्पूर्ण प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और संदेह से परे बनाये रखने के लिए निर्वाचन आयोग से मांग उठाई है कि राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े बाहरी व्यक्तियों की नियुक्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आग्रह किया है कि वे जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को बाहरी व्यक्तियों को एसआईआर प्रक्रिया से तत्काल हटाने के निर्देश दें।
अजय सिंह ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के जो प्रमाण प्रस्तुत किये हैं उसकी शुरुआत अब मध्यप्रदेश में भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दतिया में बीएलओ की मदद के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को नियुक्त कर दिया गया, उन्हें चार पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया था, जिला कांग्रेस की शिकायत पर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने बाद में पूरी सूची निरस्त कर दी। साथ ही पचास लोगों की सूची सौंपने वाले जन अभियान परिषद के जिला और ब्लाक समन्वयकों को नोटिस थमाया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनावों में भी प्रदेश भर में फैले जन अभियान परिषद के लोगों ने सत्ताधारी दल के पक्ष में खुलकर काम किया था जबकि यह परिषद अर्ध शासकीय संस्था है, इसमें भाजपा से जुड़े अनुषांगिक संगठन के लोगों को संविदा पर भर दिया गया था, अब यह सभी सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहे हैं, इसकी शिकायत 2018 में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने चुनाव आयोग से की थी, इस शिकायत पर आयोग ने कार्यवाही भी की थी, उस समय तत्कालीन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बीएल कान्ताराव ने पत्रकार वार्ता में बताया था कि सभी कलेक्टरों को जन अभियान परिषद की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गये हैं, इन सभी को चुनाव कार्यों से दूर रखने को कहा गया था। उन्होंने बताया था कि जन अभियान परिषद पन्ना के जिला समन्वयक सुशील बर्मन को भाजपा की प्रचार सामग्री बांटते हुए पकड़ा गया था और उसके विरुद्ध एफआईआर की गई थी। इसी तरह होशंगाबाद में परिषद के पदाधिकारी हर्ष तिवारी के विरुद्ध भी एफआईआर की गई थी और शासन को उसे निलम्बित करने को कहा गया था।
अजय सिंह ने कहा कि अब फिर से वही पुनरावृत्ति शुरू हो गई है, जिसे कठोरता से रोका जाना जरूरी है, उन्होंने कहा कि पूरे देश में मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा प्रदेश है जहां जन अभियान परिषद जैसी कोई सरकारी संस्था सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में खुले आम काम कर रही है, उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश के 313 ब्लाकों, 51 जिलों और 10 संभागों में भाजपा पृष्ठभूमि के लोगों को संविदा के आधार पर समन्वयक के पदों पर भर्ती किया गया था। इन सभी को 2018 में आदर्श चुनाव संहिता लगने के ठीक पहले नियमित कर दिया गया था जो आज भी कार्य कर रहे हैं, वे परिषद की हजारों समितियों, सैंकड़ों सोर्स पर्सन और हजारों विद्यार्थियों के माध्यम से सीधे सादे मतदाताओं की ब्रेन वाशिंग और बूथ मैनेजमेंट का कार्य करते हैं। अजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से समय रहते जन अभियान परिषद की गतिविधियों पर रोक लगाने का आग्रह किया है।



