आर्थिक तंगी के चलते मण्डला जिले के एक और अतिथि शिक्षक सहित अब तक 49 वीं मौतें
दो महीने के भीतर जिले में निवास, मोहगांव और यह मण्डला सहित तीन अतिथि शिक्षकों की मौतें,भारी चिंतनीय
आखिर कब तक मौतौं को गिनाती रहेगी सरकार?
जबलपुर। अस्थाई रोजागर से भी हाथ धो बैठे और स्थाई रोजगार की उम्मीद लगाए आज एक और अतिथि शिक्षक जिंदगी के जंग से हार मानने विवश होकर स्वर्ग सिधार गया।
अतिथि शिक्षक परिवार मण्डला जिला अध्यक्ष पी.डी.खैरवार ने घटना की जानकारी दी है,कि आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला से अतिथि शिक्षक तारेन्द्र जी झरिया,उम्र लगभग 28 वर्ष का कल 07/05 /2020 की रात्रि लगभग 08 बजे के आसपास मानसिक तनाव के चलते जबलपुर मेडीकल कॉलेज में उपचार के दौरान दुखद निधन हो गया है।
संक्षिप्त में दी गई जानकारी में बताया है,कि तारेंद्र विगत दो साल से अतिथि शिक्षक का काम छछटने के बाद से ज्यादा तनाव ग्रस्त जीवन जीने को मजबूर थे।
आपका निज निवास पानी टंकी के सामने,पड़ाव वार्ड,अतिथि शिक्षक परिवार जिला कार्यालय मण्डला के पीछे है।आप अतिथि शिक्षक परिवार मंडला के सक्रिय कार्यकर्ता भी रहे हैं।मण्डला जिले के अतिथि शिक्षक परिवार की ओर से गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया गया है,कि विगत वर्ष 2018-19 से ही अतिथि शिक्षक का काम तमाम कोशिश करने के बाद भी तरुण को नहीं मिल रहा था।इसके पहले लंबे समय से अतिथि शिक्षक का काम करते स्थाई रोजगार की उम्मीद से संगठन में सक्रियता के साथ संघर्ष भी करते आ रहे थे।सरकार की अतिथि शिक्षक भर्ती की गलत नीतियों के शिकार होकर तरुण को दो साल पहले बेरोजगार होना पड़ गया था।तंगी इतनी बढ़ चुकी थी,कि आमदनी का अन्य कोई स्त्रोत नहीं होने के कारण दाम्पत्य दैनंदिन जरूरतों की पूर्ति के लिए भी मोहताज होना पड़ रहा था।जिसके कारण हमेशा बड़े ही दुखी और उत्पीड़ित रहा करते थे।इस तरह परिवार में आर्थिक तंगी जरूरत से ज्यादा और चरम पर बनती ही गई।
तारेंद्र को अपने पीछे वृद्ध माता- पिता और धर्मपत्नी को छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए चले जाना ही पड़ा।
खेद के साथ निंदा और सरकार पर आरोप
भारी खेद के साथ सरकार की निंदा भी करते हैं,कि विगत दो माह के दौरान मण्डला जिले में यह तीसरी और प्रदेश में सातवी घटना है।आर्थिक तंगी के कारण अब तक संपूर्ण प्रदेश में इस तरह मौतों की संख्या 49 हो चुकी हैं।जो हमारे अतिथि शिक्षक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति तो है ही,भारी चिंता का विषय भी है,कि इस तरह अतिथि शिक्षकों की बढ़ती औसतन मौतों की संख्या सरकार और कब तक गिनती करती रहेगी।यह सरकार पता नहीं इस परिवार के साथ कितना बड़ा कहर ढाने वाली है।जिसके पीछे सिर्फ और सिर्फ स्थाई रोजगार का संकट और जिसको दूर करने लंबे समय से जारी संघर्ष का बेहतर नतीजा नहीं निकल पाना है।
पांच महीने से दिन रात चल रहे जन सत्याग्रह की ओर ध्यान नहीं सरकार का
अपने स्थाई रोजगार की मांग को लेकर भोपाल के शाहजहांनी पार्क में पांच महीने से बैठे अतिथि शिक्षकों की ओर सरकार का ध्यान बिल्कुल भी नहीं जा पा रहा है।जो तरह तरह के सवाल को जन्म देता है।जबकि विपक्ष में रहकर बीजेपी के दबंग से दबंग और तो और शिवराज सिंह जी स्वयं धरना स्थल पर ध्यान बनाये रखते थे।सत्ता पाते ही गायब हो गये।
बढ़ती मौतों के लिए सरकार ही जवाब दार
इस दुखद घटना से हम बहुत ज्यादा आहत् हैं।यदि तारेंद्र को समय पर सुनिश्चित रोजगार की इस तरह चिंता सताई नहीं हुई होती तो,आज हमारे बीच जिंदा तो होते,पर सरकार की गलत नीतियों के चलते अतिथि शिक्षक का अस्थाई काम भी इनके हाथ से निकल गया।जिसके कारण मानसिक तनाव बढ़ता गया,और अपने आपको नहीं सम्भाल पाये।जबकि तारेंद्र कई वर्षों से अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यानुभवी भी थे,बावजूद इसके कार्यानुभव का लाभ उनको सरकार से नहीं मिल पाया।
इस तरह बढ़तीं मौतों के लिए सरकार की नीतियां ही जवाबदार हैं।
इस तरह की विकट परिस्थितियों से भारी आहत होकर हम सरकार की घोर निंदा करते हैं और मध्यप्रदेश सरकार पर आरोप भी है,कि अतिथि शिक्षक परिवार के साथ अक्षम्य अपराध पर अपराध करते जा रही है।
अन्य राज्यों का अनुसरण करती क्यों नहीं सरकार?
देश के अन्य हिस्सों में तमाम राज्य सरकारें जैसे हिमांचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि अपने राज्य के अस्थाई अध्यापक/अतिथि शिक्षकों के स्थाई रोजगार की ओर सराहनीय कदम बढ़ा रहीं हैं,परंतु मध्यप्रदेश की सरकार कोई नीती पक्ष में तो दूर,विरोध में ही लेकर आती रही हैं।जिससे प्रदेश में बेरोजगार होते जा रहे अतिथि शिक्षकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।
विधवा पत्नि को मिले भरण पोषण राशी और स्थाई रोजगार
अब भी सरकार को आगाह करते हैं,कि मृतक तारेन्द्र झरिया जी की पत्नि को भरण पोषण राशी के साथ स्थाई रोजगार उपलब्ध कराया जाये,ताकि बेसहारा हो चुका इनका जीवन भी गुजार सके।
स्थाई रोजगार देकर सरकार इस तरह की उत्पीड़ित मौतों को रोके
इस तरह आर्थिक तंगी और भूख के कारण मौतों का ग्राफ न बढ़े,इसके लिए सरकार स्थाई रोजगार और जल्द से जल्द नियमितीकरण की मांग पूरी करे।
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