हौसले की सुई से बुनी सफलता की कहानी

सिवनी जबलपुर दर्पण । सिवनी जिले के घंसौर जनपद के छोटे से गाँव केदारपुर में रहने वाली श्रीमती मोनिका यादव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। कभी दूसरों की सिलाई मशीन मांगकर कपड़े सिलने वाली मोनिका अब अपनी खुद की दुकान और सिलाई व्यवसाय चला रही हैं।
मोनिका को सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन साधन सीमित थे। अपनी सिलाई मशीन न होने के कारण उन्हें हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। फिर भी, वे अपने मोहल्ले में कपड़े सिलाई का छोटा-मोटा काम करती थीं। मन में बस एक ही इच्छा थी — अपना खुद का काम हो, अपनी मशीन हो, और अपनी पहचान बने।
एक दिन उन्हें जानकारी मिली कि आजीविका मिशन घंसौर के तहत महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह बनाये जा रहे हैं। उन्होंने राधा रानी आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आत्मविश्वास मिला बल्कि आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाई दिया।
समूह की बैठकों में जब उन्हें कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) योजना के बारे में पता चला, तो उन्होंने बिना देर किए आवेदन किया। योजना के तहत 90,000 रुपये का ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपनी पहली सिलाई मशीन खरीदी। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
अब मोनिका ने सिलाई का कार्य बड़े स्तर पर शुरू किया। गाँव की महिलाएं और आसपास के लोग उनके पास कपड़े सिलवाने आने लगे। काम बढ़ने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हुई। आत्मविश्वास से भरकर मोनिका ने अपने परिवार से परामर्श लिया और कपड़ों की दुकान भी शुरू की।
आज मोनिका यादव अपने कपड़ा सिलाई कार्य और दुकान से 12 से 14 हजार प्रति माह की आय अर्जित कर रही हैं। पहले जहाँ उन्हें दूसरों पर निर्भर रह



