नरसिंहपुर दर्पणमध्य प्रदेश

दुर्भावनावश निलंबित किया है पत्रकार का शस्त्र लायसेंस

नरसिंहपुर दर्पण। नरसिंहपुर जिले में धनलक्ष्मी कम्पनी द्वारा किये जा रहे अवैध उत्खनन के विरुद्ध एनजीटी न्यायालय में याचिका दायर करने वाले पत्रकार रमाकांत कौरव के ऊपर बिना कोई जांच दर्ज हुए प्रकरण के विरोध में पूरे जिले के पत्रकारों में आक्रोश है। खनिज अधिकारी द्वारा पत्रकार व याचिकाकर्ता को डराने धमकाने वाले वायरल वीडियो से खनिज अधिकारी की मंशा एवं षड्यंत्र उजागर हो गया है। खनिज अधिकारी ओपी बघेल द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के विरोध में पूरे जिले के पत्रकार लामबंद हैं। शनिवार को प्रेस परिषद करेली के सदस्यों एवं जिले के अन्य पत्रकारों द्वारा करेली पहुंचे प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह को ज्ञापन सौंपकर रमाकांत पर दर्ज झूठी एफआईआर वापिस लेने की मांग की गई। साथ ही पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, पत्रकारो पर मामला दर्ज करने के पूर्व गृह मंत्रालय के आदेश को सख्ती से लागू करने की भी मांग की गई। एवं प्रभारी मंत्री को अवगत कराया कि किस तरह दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करते हुए रमाकांत का शस्त्र लायसेंस निलंबित किया गया है।
प्रेस परिषद द्वारा सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मीडिया लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ है, जिसे खबर करने का अधिकार है ऐसे में शासन का दायित्व है कि पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जावे। गृह मंत्रालय मप्र. शासन के स्पष्ट आदेष है कि पत्रकार पर कोई भी प्रकरण दर्ज करने के पहले शिकायत की जांच की जावे, इसके उलट शासन के आदेश को दरकिनार करते हुए मामले दर्ज किये जा रहे है जिसे रोका जावे। हाल ही मे पुलिस द्वारा खनिज अधिकारी नरसिंहपुर की झूठी शिकायत पर प्रेस परिषद के सदस्य पत्रकार रमाकांत कौरव पर मामला दर्ज कर लिया गया है जो गृह मंत्रालय के आदेश का उल्लंघन है वही दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही करते हुए उनका शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया गया है। अवैध उत्खनन के विरुद्ध एनजीटी के निर्देश पर गठित जांच दल द्वारा अवैध उत्खनन मौका जांच के दौरान सोमवार 21 जून 21 को नर्मदा नदी की घाटपिपरिया रेत खदान में जांच कर रहे दल की कवरेज करने पत्रकार गये थे। जहां करेली निवासी पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत कौरव जो कि एनजीटी न्यायालय में याचिकाकर्ता भी हैं उन्हें जिला खनिज अधिकारी द्वारा अभद्रता करते हुए दबाव बनाकर धमकाकर वहां से बाहर करने की कोशिश की गई एवं बाद में झूठी एफआईआर भी दर्ज करवा दी गई। न्यूज कवरेज करना पत्रकार का धर्म एवं अधिकार है जिससे उसे रोकना एवं दुर्भावना वश झूठा मामला बनाया जाना प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और उसके अधिकारों पर कुठाराघात है। प्रेस परिषद करेली ने प्रभारी मंत्री से मांग की है कि प्रदेश में पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जावे, पत्रकार रमाकांत कौरव पर बनाया गया झूठा मामला वापस लिया जावे।

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