सिहोरा का स्वास्थ्य शिविर: जनसेवा की आड़ में ‘फोटो-सियासत’ और भ्रष्टाचार के आरोप
सिवनी जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश के लखनादौन जनपद पंचायत के ग्राम सिहोरा में आयोजित एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर ने ‘जनसेवा’ और ‘राजनीतिक दिखावे’ के बीच की बारीक रेखा को मिटा दिया है। यह शिविर मानव सेवा का कम और राजनीतिक अखाड़े का ज़्यादा लग रहा है, जहाँ नेताओं के बीच अपनी तस्वीर छपवाने की होड़ लगी है।
सियासी पोस्टर-वॉर: जब भाजपा और कांग्रेस एक ही बैनर पर
सुखसागर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर के पोस्टरों ने एक अनोखी स्थिति पैदा कर दी है। इन पर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस, दोनों दलों के बड़े नेताओं की तस्वीरें लगी हैं। एक ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जैसे भाजपा नेताओं के चेहरे हैं, तो दूसरी ओर लखनादौन के कांग्रेस विधायक योगेंद्र सिंह बाबा भी दिखाई दे रहे हैं। यह सवाल उठाता है कि क्या यह आयोजन किसी पार्टी विशेष का है, या फिर यह सिर्फ एक ‘फोटो-ऑप’ है जहाँ हर कोई अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है?
विकास में ‘शून्य’, फोटो में ‘हीरो’
जिला पंचायत अध्यक्ष पर सवाल
इस सियासी होड़ में सबसे ज़्यादा सवाल जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया पर उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, उनके निर्वाचन क्षेत्र में पिछले तीन सालों में विकास के लिए उनकी स्व-निधि से एक भी रुपया आवंटित नहीं हुआ है। यहाँ तक कि उनके अपने गाँव में भी कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ, फिर भी उनकी तस्वीर इस शिविर के हर पोस्टर पर प्रमुखता से लगी है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब उनके क्षेत्र में पूर्व के भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच की फाइलें धूल खा रही हैं और उनकी वसूली अभी तक नहीं हुई है।
जनता सवाल कर रही है कि जब विकास के नाम पर उनका रिकॉर्ड शून्य है, तो वे जनसेवा के मंच पर कैसे अपनी तस्वीर लगा सकती हैं? क्या यह सिर्फ जनता को यह दिखाने की कोशिश है कि वे काम कर रही हैं, जबकि हकीकत कुछ और है?
”छाया पुरुष” पर लगे गंभीर आरोप: 20 करोड़ का कमीशन और पत्रकार पर ‘निराधार’ आरोप
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज आरोप जिला पंचायत अध्यक्ष के पति मुकेश डेहरिया पर लगे हैं। उन्हें कथित तौर पर ‘छाया पुरुष’ और ‘नटवरलाल’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा आवंटित लगभग 20 करोड़ की राशि में से जिले के अन्य ब्लॉकों में 40 प्रतिशत कमीशन लेकर काम दिए गए हैं।
इन आरोपों के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है: मुकेश डेहरिया ने हाल ही में एक पत्रकार पर अपनी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करने का ‘निराधार’ आरोप लगाया था। यह आरोप रात 12 बजे के बाद अशोभनीय व्यवहार का था। यह आरोप तब और संदेह पैदा करता है जब उनकी अपनी पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति में हुए अचानक बदलाव पर भी सवाल उठते हैं।
जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया इन सभी आरोपों का जवाब देने और जनता के सामने आने का साहस करेंगी? क्या वह अपने पति पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप्पी तोड़ेंगी और पत्रकार के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों पर भी अपना रुख स्पष्ट करेंगी?
यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि हमारे कुछ नेता सेवा के लिए नहीं, बल्कि तस्वीर के लिए दौड़ रहे हैं। ‘जनसेवा परम धर्म’ अब ‘राजनीतिक दिखावा’ बनकर रह गया है, जहाँ भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत स्वार्थ को जनसेवा के पर्दे के पीछे छिपाने की कोशिश की जा रही है।
क्या जनता अपने जनप्रतिनिधियों से इस तरह के विरोधाभास और भ्रष्टाचार का हिसाब मांग पाएगी?



