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संपादकीय/लेख/आलेख

आधुनिक हिंदी साहित्य के अग्रदूत भारतेंदु हरिश्चंद्र

हिंदी साहित्य के आधुनिक कालीन अग्रदूत भारतेंदु हरिश्चंद्र बहुमुखी प्रतिभा के प्रतिभाशाली व्यक्तित्व है। इसी प्रतिभा के कारण कवि हरिश्चंद्र जी को 1880 में हिंदी साहित्य की श्री वृद्धि हेतु" भारतेंदु"…

महंगाई ऋतु

यह तक कि सरकार गिर जाए इतनी ताकत रखती हैं महंगा ऋतु। ये वो ऋतु हैं जो हर युग को दुःख ग्रस्त रखती हैं। खास कर करोना के बाद तो खूब महंगाई बढ़ी हैं,सभी उद्योग जो काफी समय तक लोकडाउन में बंद रहे और बाद…

शिक्षक अंधकारमय जीवन में प्रकाश की जोत

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय , बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए ।। 5 सितंबर शिक्षक दिवस गुरुओं के लिए चुना गया वो दिन जिसने किसी को भी अनछुआ नहीं छोड़ा । हर वर्ग, हर जाति, हर धर्म के मानव…

वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा व शिक्षको का सम्मान

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है । डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 1888 में तिरुट्टनी में हुआ था। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन सबसे पहले एक शिक्षक थे…

त्रेतायुग में कान्हा की हो गई थी बांसुरी

भगवान श्रीकृष्ण के धारण किए गए प्रतीकों में बांसुरी हमेशा से जिज्ञासा का केंद्र रही है। हालांकि सर्वाधिक लोग भगवन की बांसुरी से जुड़े हुए रहस्यों और तथ्यों को नहीं जानते हैं। सच्चाई यह है, भगवान…

मंत्री सांसद विधायक जन प्रतिनिधि से जनता की मार्मिक अपील

विषय:- आपके द्वारा बड़ते डीजल पेट्रोल रसोई गैस बेरोजगारी विधुत कटोती बडती महगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है माननीय इससे छुटकारा पाने का आशीर्वाद प्रदेश की जनता को देने बाबत आपसे प्रार्थना है कि…

कान्हा की बांसुरी में जीवन का सार

• प्रो. श्याम सुंदर भाटिया भगवान श्रीकृष्ण के धारण किए गए प्रतीकों में बांसुरी हमेशा से जिज्ञासा का केंद्र रही है। हालांकि सर्वाधिक लोग भगवन की बांसुरी से जुड़े हुए रहस्यों और तथ्यों को नहीं जानते…

प्रीत कान्हा संग

प्रीत कान्हा संग कान्हाई तू जब बंसी बजाई लूट लियो मेरो मन,ये हैं कैसी सगाई जितना देखू तोहे दिल नहीं भरता कैसे कटेगी जुदाई, ओ कन्हाई तेरी ही याद में दिन बीतें और बीतें हैं रतियां…

विषय : “राष्ट्र के पुनरुत्थान में साहित्य की भूमिका “

भारत में साहित्य का हमेशा विशेष स्थान रहा है! साहित्य विभिन्न भाषाओं की एक अत्यंत समृद्ध परंपरा है साहित्य समाज में सौहार्द एकता सामाजिक स्तर पर जागरूकता लाता है। इसीलिए हम कह सकते हैं की राष्ट्रहित…

“भुजलिया उत्सव”

“बुंदेलखंड के महोबा में आल्हा-उदल-मलखान की वीरता के किस्से आज भी सुनाए जाते हैं। बुंदेलखंड की धरती पर आज भी इनकी गाथाएं लोगों को मुंह जुबानी याद है।“रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाने वाला भुजरिया पर्व…